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किसी भी प्रोफेशन में ड्रेस कोड उस संस्था की मर्यादा और अनुशाशन को प्रभासित करती है. भारत सहित दुनिया के लगभग सभी देशो में जज, वकील तथा न्यायपालिका से सम्बंधित सभी लोग काले कोट या गाउन का इस्तेमाल करते है. काले कोट या गाऊन के निचे वाइट शर्ट और गले में एक खास किस्म की टाई पहनी जाती है, जिसे नेकबैंड कहा जाता है। 

असल में काले रंग को चुनने के पीछे दो कारन थे, पहला ये की उस समय रंगो के विकल्प ज्यादा उपलब्ध नहीं थे, बैंगनी ने रॉयलिटी का संकेत पहले ही अपने नाम किया हुआ था, और बाकि रंग भी इसी तरह किसी ना किसी प्रतिक और संकेत के रूप में इस्तेमाल किये जा चुके थे, दूसरा कारन था की कला रंग अथॉरिटी और पावर का प्रतिक माना जाता है, सर्वस्त्र समर्पण का प्रतिक माना जाता है, 

काले के निचे सफेद शर्ट का ये संकेत है की ये प्रकाश, सच्चाई और ईमानदारी का प्रतिक है, और सफ़ेद ही नेकबैंड इसलिए की ये मासूमियत और निष्पक्षता का प्रतिक है. किसी भी देश में आम आदमी को न्याय दिलाने वाला उसकी उम्मीदों की किरण सिर्फ वकील होता है जिसपे उसे पूरा भरोसा होता है, इसी भरोसे को हर पल याद दिलाने के लिए ये ड्रेस कोड रखी गई है. 

अभी हाल ही में भारत के Supreme Court ने जजों तथा वकीलों को ब्लैक कोट तथा गाऊन ना पहनने की सलाह दी है. यैसा इतिहास में पहली बार हुआ है जब किसी अदालत ने वकीलों को यैसा आदेश दिया है. यह आदेश कोरोना महामारी के फैलते सवरूप को देखते हुए दिया गया है. इससे पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने ये कह कर ये छूट की कोट तथा गाउन से संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा है.

One thought on “क्यों दी Supreme Court ने वकीलों को Black Coat पहनने से छूट?”

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